काश दिमाग मे भी होता एक ट्रॅफिक सिग्नल
आने जाने वाले यादो को नियंत्रण मे रखता ।
कुछ जो लुभवानी है उसे लाल बत्ती दिखाकर रोक लेते, जो मन को विचलित करे परेशान करे उन्हे हरी बत्ती दिखाकर रवाना कर देते ।
और कुछ वो यादे जो मन को खुश तो नही रखती पर उनके रहने से अपने होने का यकीन होता है , उनके लिये नारंगी बत्ती जलाकर कुछ पल अपने पास रख लेते ।
पर उसमे भी होंगे कुछ खुराफाती जो लाल बत्ती मे भी निकल जाये और पीछे छोड जाये उन्हे जिनके लिये हरी जलाकार रखी है !