अचानक लगता है कि कुछ दिन यूँ ही सोते हुए बीत गए हैं। आज की तारीख देखने पर अचरज होता है। हिसाब लगाने बैठो तो पुराने दिन धुंध में डूबे हुए लगते हैं। कुछ पकड़ में आता है, कुछ छूटा रहता हूँ हमेशा के लिए। क्या सच में कुछ छूट जाता है-हमेशा के लिए? क्या …
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अचानक लगता है कि कुछ दिन यूँ ही सोते हुए बीत गए हैं। आज की तारीख देखने पर अचरज होता है। हिसाब लगाने बैठो तो पुराने दिन धुंध में डूबे हुए लगते हैं। कुछ पकड़ में आता है, कुछ छूटा रहता हूँ हमेशा के लिए। क्या सच में कुछ छूट जाता है-हमेशा के लिए? क्या …